2300 फ़ीट की ऊंचाई पर बसा भारत का सबसे भयानक किला । Kalavantin / Prabalgad Trek

2300 फ़ीट की ऊंचाई पर बसा भारत का सबसे भयानक किला । Kalavantin / Prabalgad Trek

2300 फ़ीट की ऊंचाई पर बसा भारत का सबसे भयानक किला । Kalavantin / Prabalgad Trek
kalavantin durg trek
2300 फुट ऊची खड़ी पहाड़ी पर बना भारत का सबसे खतरनाक किला जिसके बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। इस किले के बारे में यह कहा जाता है। कि इस किले में बहुत कम लोग ही आते हैं और जो यहां आते है। वह सूर्यास्त के पहले ही वापस चले जाते हैं। इस किले पर सूर्यास्त के बाद या अंधेरा होने के बाद रहने की मनाई है।

दोस्तों यह किला कलावंती किले के नाम से मशहूर है और जिसे ऊची खड़ी पहाड़ी पर बसा भारत का सबसे सबसे खतरनाक किला कहा जाता है। दरअसल इस किले तक पहुंचने का रास्ता इतना मुश्किल है। कि ज्यादातर लोग तो यहा तक आने की हिम्मत ही नहीं कर पाते और जो भी आता है। वह सूर्यास्त से पहले वापस लौट जाता है। दरअसल खड़ी चढ़ाई होने के कारण आदमी यहां लंबे समय तक टिक नहीं पाता साथ ही बिजली पानी से लेकर यहां किसी भी प्रकार की कोई भी व्यवस्था नहीं है। शाम होते ही मिलो दूर तक सन्नाटा फैल जाता है। जिसके बाद वापस लोट पाना बेहद कठिन हो जाता है।


इसकी चढ़ाई इतनी खतरनाक है। कि एक छोटी सी चूक से जान भी जा सकती है। इस किले पर चढ़ने के लिए चट्टानों को काटकर सीढ़ियां बनाई गई है। इन सीढ़ियां पर ना तो रसिया है और ना ही कोई रेलिंग बताया जाता है। कि चढ़ाई के समय जरासी भी चूक हुई या आदमी का पैर फिसला तो आदमी 2300 फुट नीचे खाई में ही गिरता है। इस किले से गिरने पर आज तक कई लोगों ने अपनी जान गवाई है और यही कारण है। कि यहां बहुत कम लोग ही आते हैं, पर ऐसे लोग जो अपने जीवन को जिंदादिली से जीते हैं व जिन्हें हर वक़्त नई जगह पर घूमने की होड़ सी लगी रहती है। जो लोग एडवेंचर ट्रेनिंग के दीवाने होते हैं और वो अपनी जान को जोखिम में डालने से नहीं डरते हैं। उनके लिए तो यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं।

2300 फ़ीट की ऊंचाई पर बसा भारत का सबसे भयानक किला । Kalavantin / Prabalgad Trek
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दोस्तों इस कलावंती किले की खूबसूरती देखते ही बनती है और कभी-कभी तो इस किले के ऊपर ऐसा मनोरम दृश्य बनता है। कि जिस के आकर्षण से आकर्षित होकर लोग अपनी जान को जोखिम में डालकर भी इस 2300 फुट ऊची खड़ी पहाड़ पर जाते हैं। 


दोस्तों ज़रा महसूस कीजिए। कि आप एक 2300 फुट ऊंचे एक संकरे से पहाड़ पर खड़े हैं। उस पहाड़ से आपको चारों तरफ हरियाली ही हरियाली दिख रही है। तभी हल्का सा कोहरा और धुध की चादर अचानक से उस पहाड़ को घेर लेती है और कोहरे के बीच से आती सूरज की रोशनी एक दिव्य आभा की तरह आपके ऊपर प्रकाशित होती है। यह ऐसा पल है। जिसमें आप कुछ समय के लिए खो से जाते हैं और प्रकृति की असीम खूबसूरती का एहसास करते हैं।

ऐसा ही कुछ नजारा इस पहाड़ के ऊपर दिखता है। जहां यह कलावंती किला मौजूद है। दोस्तों इस किले के पास प्रबलगढ़ किला भी मोजूद है और इसका निर्माण ब्रहमाणी सल्तनत के दौरान हुआ था। 1498 मे अहमदनगर सल्तनत के प्रधानमंत्री मलिक अहमद अली ने कोंक्र्ण पर जीत के साथ ही इस किले पर कब्जा कर लिया था। ब्रहमाणी सल्तनत के पतन के बाद यह किला अहमदनगर सल्तनत के कब्जे में ही रहा। 1657 में छत्रपति शिवाजी महाराज ने मुगलों को हराकर के फिर से इस किले पर कब्जा कर लिया था। इस किले के पास ही स्थित है। कलावंती किला शिवाजी ने रानी कलावंती के नाम पर ही इस किले का नाम रखा था। कलावंती दुर्ग के किले से चंदेरी, करनाल के किले भी नजर आते हैं। मुंबई शहर का कुछ हिस्सा भी इस किला से देखा जा सकता है। अक्टूबर से मई तक इस किले पर चढ़ाई की जा सकती है। बारिश के दिनों में यह चढ़ाई बेहद ही खतरनाक हो जाती है।

2300 फ़ीट की ऊंचाई पर बसा भारत का सबसे भयानक किला । Kalavantin / Prabalgad Trek
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दोस्तों अगर आपको मौका मिले तो आप क्या यहां जाना चाहेंगे अपने विचार हमें कमेंट बॉक्स में जरूर लिखे। यहां तक कैसे पहुंचे इसकी पूरी जानकारी हमने आपको नीचे दी है। 


दोस्तों हम आपको सलाह देते है कि इन किलो की चढ़ाई बहुत ही खतरनाक है , आप अपनी समझ बूझ के साथ ही इन किलो पर चढ़ने का प्रयास करे, क्योकि यहाँ बहुत सारी दुर्घटनाये घट चुकी है । 

पता: प्रभालमानी, पनवेल, महाराष्ट्र 410206 प्रबलगढ़ या कलावंटिन दुर्ग तक कैसे पहुंचे बस: मुंबई से शेदुंग फता तक एक राज्य परिवहन बस लें और फिर ठाकुरवाड़ी पहुंचने के लिए वहां से एक रिक्शा लें।

ट्रेन: मुंबई से पनवेल तक एक ट्रेन लें और फिर ठाकुरवाडी पहुंचने के लिए एक वाहन (टम-टम या ऑटो-रिक्शा) किराए पर लें।


वायु द्वारा: मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज हवाई अड्डा प्रबलगढ़ का सबसे निकटतम हवाई अड्डा है।

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